Greatest Queen Warriors In Indian History: देश की इन बहादुर रानियां ने अपने बलिदान से लिखी अमरता की कहानी

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Greatest Queen Warriors In Indian History

Greatest Queen Warriors In Indian History: आज जब हमारे समाज में नारी को अबला ओर कमज़ोर माना जाता है, लेकिन क्या आपको पता है कि अगर भारतीय इतिहास पर नज़र डाली जाए तो ऐसी अनेक रानिया मिलेगी जो अपने शौर्य और वीरता के लिए जानी जाती है। ये हम सभी जानते है कि हज़ारों वर्ष तक हिन्दू राजाओं को विदेशी आकर्मणतकर्ताओं के साथ-साथ पड़ोसी राजाओं से मिल रही चुनौती का सामना भी करना पड़ता था। मध्यकाल और अंग्रेज काल में कई राजाओं और रानियों को अपना बलिदान देना पड़ा था। उस समय ऐसी कई मौके आए, जब राज्य की बागडोर रानियों को संभालना पड़ी और वो हंसते-हंसते देश पर अपनी जान न्योछावर कर अमर हो गई। आज हम आपको हिंदुस्तान की ऐसी ही वीर रानियों (Greatest Queen Warriors In Indian History) के बारे में बताएंगे।

Greatest Queen Warriors In Indian History

  1. महारानी पद्मिनी (Maharani Padmini)

रानी पद्मिनी का नाम इस सूची में सबसे पहले आता है। राजा गंधर्व सेन और रानी चंपावती की पुत्री थीं रानी पद्मिनी। इनका विवाह चित्तौड़ के राजा रत्नसिंह (Ratan Singh) के साथ हुआ था। रानी पद्मिनी की सुंदरता और वीरता के चर्चे दूर-दूर तक फैले थे। रानी की सुंदरता पर दिल्ली के सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी का दिल आ गया था। रानी को हासिल करने के जुनून में खिलजी ने चित्तौड़ पर हमला कर दिया। इस हमले में खिलज़ी ने राजा रतनसिंह को धोखे से मार दिया था। इसके बाद 1303 ईस्वी में रानी पद्मिनी ने राजपूत वीरांगनाओं के साथ जौहर की अग्नि में आत्मदाह कर लिया था।

  1. रानी दुर्गावती (Rani Durgawati)

वर्ष 1524 में वीरांगना महारानी दुर्गावती का जन्म कालिंजर के राजा कीर्तिसिंह चंदेल के घर हुआ था और ये उनकी एकमात्र संतान थीं। उनका विवाह राजा संग्राम शाह के पुत्र दलपत शाह से हुआ था। दुर्भाग्यवश विवाह के 4 वर्ष बाद ही राजा दलपतशाह मृत्यु हो गई। उस समय दुर्गावती का पुत्र नारायण 3 वर्ष का था तो रानी ने गढ़मंडला का शासन संभाला। वर्तमान जबलपुर उनके राज्य का केंद्र था। मुग़ल बादशाह अकबर अन्य राजपूत घरानों की विधवाओं की तरह दुर्गावती को भी अपने रनवासे की शोभा बनाना चाहता था। रानी दुर्गावती ने अकबर के जुल्म के आगे झुकने के बजाय युद्ध का मैदान चुना। उन्होंने कई बार शत्रुओं को धूल चटाई और 1564 में बलिदान दे दिया

  1. रानी कर्णावती (कर्मवती) (Rani Karnavati or Karmavati)

राजस्थान के मेवाड़ की रानी कर्णावती का नाम इतिहास में सुनहरे अक्षरों में दर्ज़ है। एक ओर मुगल सम्राट हुमायूं अपने राज्य का विस्तार करना चाहता था तो दूसरी ओर गुजरात के सुल्तान बहादुर शाह ने 1533 ईस्वी में चित्तौड़ पर आक्रमण किया था। रानी कर्णावती चित्तौड़ के राजा की विधवा थीं। रानी के दो पुत्र राणा उदयसिंह और राणा विक्रमादित्य थे। रानी कर्णावती ने अपनी चतुराई का परिचय देते हुए हुमांयू के आगे संधि का प्रस्ताव रखा कि हम अपने समान शत्रु का एक साथ सामना करे। हुमांयू किसी को नहीं बख्शता था लेकिन कर्णावती को हुमांयू ने अपनी धर्म बहन माना था इसलिए राखी की लाज रखते हुए उसने राज्य की रक्षा की।

  1. झांसी की रानी लक्ष्मीबाई (Jhansi Ki Rani Laxmi Bai)

झांसी की रानी लक्ष्मीबाई का जन्म 19 नवंबर 1835 में वाराणसी में हुआ था। 4 साल की उम्र में ही इनकी माता का देहांत हो गया था इसलिए मनु का पालन-पोषण उनके पिता ने किया था। 1842 में मनु की शादी झांसी के राजा गंगाधर राव से हो गयी और इनको ‘लक्ष्मीबाई’ नाम दिया गया। लक्ष्मीबाई के पति का स्वास्थ्य बिगड़ते देख सबने उत्तराधिकारी के रूप में एक पुत्र गोद लेने की सलाह दी। इसके बाद रानी ने दामोदर राव को गोद लिया। 21 नवंबर 1853 को महाराजा गंगाधर राव की मृत्यु हो गई और रानी अकेली रह गई। रानी लक्ष्मीबाई ने हिम्मत नहीं हारी और राजय को संभाला। ब्रिटिश सरकार ने बालक दामोदर को झांसी का उत्तराधिकारी ना मानते हुए झांसी को ब्रितानी राज्य में मिलाने की साज़िश रची। रानी ने ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ जंग का एलान किया और घोड़े पर सवार हो व पुत्र को अपनी पीठ पर बांध कर अंग्रेज़ों पर कहर की तरह टूट पड़ी। युद्ध में उन्होंने अपने प्राणों का बलिदान दे दिया।

देश के लिए अपने प्राणों की आहूति देने वालों की लिस्ट इससे कही लम्बी है जिनके बलिदान के बदौलत आज हम बेख़ौफ़ और आज़ाद हवा में साँस ले रहे है।

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