Vikram Lander Found: चाँद पर मिला विक्रम लैंडर, आने वाले 12 दिन होंगे इसरो के लिए अहम

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Vikram Lander Found: चंद्रयान-2 (Chandrayan 2) के माध्यम से भारत चाँद के दक्षिणी ध्रुव पर उतरकर अपना नाम इतिहास के पन्नों में दर्ज़ करना चाहता था। हम सभी भारतीयों का यह सपना सच होने वाला ही थी कि शुक्रवार की देर रात और शनिवार की सुबह जब विक्रम लैंडर (Vikram Lander) चांद की सतह से महज 2.1 किलोमीटर की दूरी पर था तभी इससे इसरो (ISRO) का संपर्क टूट गया। इसी के बाद से भारतीय वैज्ञानिक लगातार विक्रम को ढूंढ़ने में लगे हुए थे। सभी को ये आशंका थी कि कही विक्रम हादसे का शिकार तो नहीं हो गया है।

Vikram Lander Found: चाँद की सतह पर मिला विक्रम लैंडर

विक्रम लैंडर (Vikram Lander) से संपर्क टूटने के बाद इसरो (ISRO) इसको लगातार खोज रहा था। इसरो को विक्रम लैंडर का पता चल गया है कि विक्रम लैंडर अपने तय स्थान से करीब 500 मीटर की दूरी पर चांद की जमीन पर गिरा पड़ा है लेकिन अगर इसरो उससे संपर्क स्थापित कर लेती है तो विक्रम लैंडर वापस अपने पैरों पर खड़ा हो सकता है।

विक्रम लैंडर के चांद की सतह पर गिरने से इसरो ने अभी तक हार नहीं मानी है। सूत्रों के अनुसार, चंद्रयान-2 के विक्रम लैंडर (vikram lander found) में वह टेक्नोलॉजी है कि वह गिरने के बाद भी खुद को खड़ा करने में सक्षम है, लेकिन उसके लिए जो सबसे जरुरी है विक्रम लैंडर के साथ कम्युनिकेशन संपर्क हो जाए जिससे वो कमांड रिसीव कर सके। इस काम में सफलता मिलने की उम्मीदें सिर्फ 1 फीसदी ही है। इसरो वैज्ञानिकों के अनुसार, कम से कम एक प्रतिशत ही सही, लेकिन उम्मीद तो अभी ज़िंदा है।

कैसे अपने पैरों पर खड़ा होगा विक्रम लैंडर – India Moon Mission

इसरो (ISRO) के करीबी सूत्रों के मुताबिक, विक्रम लैंडर के नीचे की तरफ पांच थ्रस्टर्स लगे हैं जिसके मदद से ही चांद की सतह पर इसे सॉफ्ट लैंडिंग करनी थी। इसके अतिरिक्त भी, विक्रम लैंडर के चारों तरफ भी थ्रस्टर्स लगाए गए हैं, जो अंतरिक्ष में यात्रा के दौरान उसकी दिशा को निश्चित करने में सहायता करते थे। विक्रम लैंडर के ये थ्रस्टर्स अब भी सुरक्षित हैं। विक्रम लैंडर के जिस भाग में कम्युनिकेशन एंटीना दब गया है, उसी हिस्से में भी थ्रस्टर्स हैं। यदि पृथ्वी पर मौजूद इसरो स्टेशन से भेजे गए कमांड को सीधे या ऑर्बिटर के जरिए दबे हुए एंटीना रिसीव करने में सफल हुआ तो उसके थ्रस्टर्स को वापिस ऑन किया जा सकता है। एक बार थ्रस्टर्स ऑन हो जाए तो विक्रम एक तरफ से वापस उठकर अपने पैरों पर खड़ा होने में सक्षम होगा।। अगर ऐसा संभव हुआ तो इस मिशन से जुड़े वो सभी प्रयोग हो पाएंगे जो इसरो के वैज्ञानिकों ने चंद्रयान-2 को लेकर निश्चित किये हुए थे।

रविवार को इसरो प्रमुख के। सिवन ने कहा था कि “इसरो की टीम लैंडर विक्रम से कम्युनिकेशन स्थापित करने की लगातार कोशिश कर रही है और जल्द ही संपर्क स्थापित हो जाएगा”। वैज्ञानिकों की माने तो उनके पास विक्रम लैंडर से संपर्क करने के लिए सिर्फ 11 दिन का समय हैं क्योंकि अभी लूनर डे चल रहा है। एक लूनर डे धरती के 14 दिनों के बराबर होता है। इसमें से 3 दिन बीत गए हैं। यानि चांद पर अगले 11 दिनों तक दिन ही रहेगा। उसके बाद चांद पर रात हो जाएगी, जो पृथ्वी के कुल 14 दिन के समान होती है। रात के समय संपर्क स्थापित करने में मुश्किल का सामना करना पड़ेगा और इसरो वैज्ञानिकों को थोड़ा अधिक इंतजार करना पड़ेगा।

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